मेघालय

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मेघालय
राज्य
चेरापुंजी, पूर्वोत्तर भारत का सर्वाधिक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण, मेघालय में स्थित है एवं एक कैलेण्डर वर्ष में विश्व की सर्वाधिक वर्षा का कीर्तिमान धारण करता है।
चेरापुंजी, पूर्वोत्तर भारत का सर्वाधिक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण, मेघालय में स्थित है एवं एक कैलेण्डर वर्ष में विश्व की सर्वाधिक वर्षा का कीर्तिमान धारण करता है।
Official seal of मेघालय
Seal
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निर्देशांक (शिलाँग): 25°34′N 91°53′E / 25.57°N 91.88°E / 25.57; 91.88निर्देशांक: 25°34′N 91°53′E / 25.57°N 91.88°E / 25.57; 91.88
राष्ट्र Flag of India.svg भारत
स्थापना २१ जनवरी १९७२
राजधानी शिलांग
सबसे बडा शहर शिलांग
जिले ११
शासन
 • विधान सभा एकसदनीय (६० क्षेत्र)
 • संसदीय निर्वाचन क्षेत्र राज्य सभा
लोक सभा
 • उच्च न्यायालय मेघालय उच्च न्यायालय
क्षेत्रफल
 • कुल 22,429
क्षेत्र दर्जा २३वां
जनसंख्या (२०१६)
 • कुल 3
 • दर्जा २३वां[1]
 • घनत्व <
समय मण्डल IST (यूटीसी+०५:३०)
आई॰एस॰ओ॰ ३१६६ कोड IN-ML
HDI Green Arrow Up Darker.svg 0.585 (मध्यम)
एचडीआई दर्जा १९वां (२००५)
साक्षरता 75.84% (२४वां]])[1]
आधिकारिक भाषा गारो एवं खासी भाषाएं[2]
वेबसाइट meghalaya.gov.in
इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्संगठन) अधिनियम १९७१ के अन्तर्गत १९७१ में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला

मेघालय (UK /mˈɡɑːləjə/,[3] US /ˌmɡəˈlə/)[4] पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य है। इसके नाम का शाब्दिक अर्थ है: मेघों का आलय या घर। २०१६ के अनुसार यहां की जनसंख्या ३२,११,४७४ है।[5] मेघालय का विस्तार २२,४३० वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में है, जिसका लम्बाई से चौडाई अनुपात लगभग ३:१ का है।[6]

राज्य का दक्षिणी छोर मयमनसिंह एवं सिलहट बांग्लादेशी विभागों से लगता है, पश्चिमी ओर रंगपुर बांग्लादेशी भाग तथा उत्तर एवं पूर्वी ओर भारतीय राज्य असम से घिरा हुआ है। राज्य की राजधानी शिलांग है। भारत में ब्रिटिश राज के समय तत्कालीन ब्रिटिश शाही अधिकारियों द्वारा इसे "पूर्व का स्काटलैण्ड" की संज्ञा दी थी।[7] मेघालय पहले असम राज्य का ही भाग था, २१ जनवरी १९७२ को असम के खासी, गारो एवं जैन्तिया पर्वतीय जिलों को काटकर नया राज्य मेघालय अस्तित्व में लाया गया। यहां की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। इसके अलावा अन्य मुख्यतः बोली जाने वाली भाषाओ में खासी, गारो, प्नार, बियाट, हजोंग एवं बांग्ला आती हैं। इनके अलावा यहां हिन्दी भी कुछ कुछ बोली समझी जाती है जिसके बोलने वाले शिलांग में मुख्यतः मिलते हैं। भारत के अन्य राज्यों से अलग यहां मातृवंशीय प्रणाली चलती है, जिसमें वंशावली मां (महिल) के नाम से चलती है और कनिष्ठतम बेटी अपने माता पिता की देखभाल करती है तथा उसे ही उनकी सारी सम्पत्ति मिलती है[7]

यह राज्य भारत का आर्द्रतम क्षेत्र है, जहां वार्षित औसत वर्षा 12,000 मि॰मी॰ (39 फीट) दर्ज हुई है।[6] राज्य का ७०% से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है।[8] राज्य में मेघालय उपोष्णकटिबंधीय वन पर्यावरण क्षेत्रों का विस्तार है, यहां के पर्वतीय वन उत्तर से द्क्षिण के अन्य निचले क्षेत्रों के उष्णकटिबन्धीय वनों से पृथक हैं। ये वन स्तनधारी पशुओ, पक्षियों तथा वृक्षों की जैवविविधता के मामलों में विशेष उल्लेखनीय हैं।

मेघालय में मुख्य रूप से अग्रेरियन अर्थव्यवस्था है जिसमें वाणिज्यिक वन उद्योग का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहां की मुख्य फ़सल में आलू, चावल, मक्का, अनान्नास, केला, पपीता एवं बहुत से मसाले, आदि हैं। सेवा क्षेत्र में मुख्यतः अचल सम्पत्ति एवं बीमा कम्पनियां हैं। वर्ष २०१२ के लिये मेघालय का सकल राज्य घरेलू उत्पाद भारतीय रुपया16,173 करोड़ (US$2.36 बिलियन) अनुमानित था।[9] राज्य भूगर्भ सम्पदाओ की दृष्टि से खनिजों से सम्पन्न है किन्तु अभी तक इससे सम्बन्धित कोई उल्लेखनीय उद्योग चालू नहीं हुए हैं।[7] राज्य में लगभग 1,170 कि॰मी॰ (3,840,000 फीट) लम्बे राष्ट्रीय राजमार्ग बने हैं। यह बांग्लादेश के साथ व्यापार के लिए एक प्रमुख लाजिस्टिक केंद्र भी है।[6]

इतिहास[संपादित करें]

प्राचीन

मेघालय, अन्य पड़ोसी भारतीय राज्यों के साथ पुरातात्त्विक रुचि का केन्द्र रहा है। यहां लोग नवपाषाण युग से निवास करते आ रहे हैं। अब तक खोजे गए नवपाषाण स्थल प्रायः ऊंची पर मिले हैं, जैसे खासी और गारो पर्वत एवं पड़ोसी राज्यों में भी। यहां नवपाषाण शैली की झूम कृषि शैली अभी तक अभ्यास में है। यहां के हाईलैण्ड पठार खनिज सम्पन्न मृदा के साथ साथ प्रचुर वर्षा होने पर भी बाढ़ से रोकथाम उपलब्ध कराते हैं।[10] मानव इतिहास में मेघालय का महत्त्व धान की फ़सल के घरेलु व्यावसायीकरण से जुड़ा हुआ है। चावल के उद्गम से जुड़े प्रतिस्पर्धी सिद्धांतों में आयन ग्लोवर के सिद्धांत के अनुसार, "भारत २०,००० से अधिक पहचान वाली प्रजातियों के साथ घरेलु चावल की सबसे बड़ी विविधता का केंद्र है और पूर्वोत्तर भारत घरेलु चावल की उत्पत्ति का सबसे अनुकूल एकल क्षेत्र है। "[11] मेघालय की पहाड़ियों में की गयी सीमित पुरातात्विक शोध सुझाती है कि यहां मानव का निवास प्राचीन काल से रहा है। भारत२०,००० से अधिक पहचान वाली प्रजातियों के साथ पालतू चावल की सबसे बड़ी विविधता का केंद्र है और पूर्वोत्तर भारत पालतू चावल की उत्पत्ति का सबसे अनुकूल एकल क्षेत्र है।

आधुनिक इतिहास

मेघालय का गठन असम राज्य के दो बड़े जिलों संयुक्त खासी हिल्स एवं जयन्तिया हिल्स को असम से अलग कर २१ जनवरी, १९७२ को किया गया था। इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने से पूर्व १९७० में अर्ध-स्वायत्त दर्जा दिया गया था।[12]

१९वीं शताभ्दी में ब्रिटिश राज के अधीन आने से पूर्व गारो, खासी एवं जयन्तिया जनजातियों के अपने राज्य हुआ करते थे। कालान्तर में ब्रिटिश ने मेघालय को असम के अधीन १८३५ में कर दिया था।[13] तब इस क्षेत्र को ब्रिटिश राज के साथ एक सन्धि के तहत अर्ध-स्वतंत्र दर्जा मिला हुआ था। १६ अक्तूबर १९०५ में लॉर्ड कर्ज़न द्वारा बंगाल के विभाजन होने पर मेघालय नवगठित प्रान्त पूर्वी बंगाल एवं असम का भाग बना। हालांकि इस विभाजन के १९१२ में वापस पलट दिये जाने पर मेघालय असम का भाग बना। ३ जनवरी १९२१ को भारत सरकार के १९१९ के अधिनियम की धारा 52 ए के अनुसरण में, गवर्नर-जनरन इन काउन्सिल ने मेघालय के खासी राज्य के अलावा अन्य सभी क्षेत्रों को पिछड़े क्षेत्र घोषित कर दिया था। इसके बाद, ब्रिटिश प्रशासन ने भारत सरकार के अधिनियम १९३५ के तहत इसे अधिनियमित किया। इस अधिनियम के अन्तर्गत पिछाड़े क्षेत्रों को दो श्रेणियों,- अपवर्जित एवं आंशिक अपवर्जित में पुनर्समूहीकृत किया।

१९४७ में स्वतंत्रता के समय, वर्तमान मेघालय में असम के दो जिले थे और यह क्षेत्र असम राज्य के अधीन होते हुए भी सीमित स्वायत्त क्षेत्र था।

१९६० में एक पृथक पर्वतीय राज्य की मांग उठने लगी।[12] १९६९ के असम पुनर्संगठन (मेघालय) अधिनियम के अन्तर्गत मेघालय को स्वायत्त राज्य बनाया गया। यह अधिनियम २ अप्रैल १९७० को प्रभाव में आया. असम से मेघालय नाम का एक स्वायत्त राज्य पैदा हुआ। भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अनुसार इस स्वायत्त राज्य के पास एक ३७ सदस्यीय विधान सभा बनी।

१९७१ में संसद ने पूर्वोत्तर पुनर्गठन अधिनियम पास किया जिसके अन्तर्गत्त मेघालय को २१ जनवरी १९७२ को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ और अपनी स्वयं की मेघालय विधान सभा बनी।[12]

भूगोल[संपादित करें]

Meghalaya is mountainous, the most rain soaked state of India. The word Meghalaya means, "abode of the clouds". Above is Laitmawsiang landscape wrapped in fog.

मेघालय पूर्वोत्तर भारत की सात बहनों वाले राज्य में से एक है। मेघालय एक पर्वतीय राज्य है जिसमें घाटियों और पठारों तथा ऊंची-नीची भूमि वाले क्षेत्र हैं। यहाँ पर भूगर्भीय सम्पदा भी प्रचुर उपलब्ध है। यहां मुख्यतः आर्कियन पाषाण संरचनाएं हैं। इन पाषाण शृंखलाओं में कोयला, चूना पत्थर, यूरेनियम और सिलिमैनाइट जैसे बहुमूल्य खनिजों के भण्डार हैं।

मेघालय में कई नदियां भी हैं जिनमें से अधिकांश वर्षा आश्रित और मौसमी हैं। गारो पर्वतीय क्षेत्र की कुछ महत्त्वपूर्ण नदियां हैं: गनोल, दारिंग, सांडा, बाड्रा, दरेंग, सिमसांग, निताई और भूपाई। पठार के पूर्वी एवं मध्य भागों में ख्री, दिगारू, उमियम, किन्शी (जादूकता), माओपा, उमियम और बड़ापानी, उम्नगोट और मिन्डटू नदियाम हैं। दक्षिणी खासी पर्वतीय क्षेत्र में इन नदियों द्वारा गहरी गॉर्ज रूपी घाटियां एवं ढेरों नैसर्गिक जल प्रपात निर्मित हुए हैं।

Agriculture farms in Meghalaya (above) are on hilly terrain.

पठार क्षेत्र की ऊंचाई 150 मी॰ (490 फीट) से 1,961 मी॰ (6,434 फीट) के बीच रहती है। पठार के मध्य भाग में खासी पर्वतमाला के भाग हैं जिनकी अधिकतम ऊंचाई है। इसके बाद दूसरे स्थान पर जयन्तिया पर्वतमाला वाला पूर्वी भाग आता है। मेघालय का उच्चतम स्थान शिलाँग पीक है, जहां बड़ा वायु सेना स्टेशन है। यह खासी पर्वत का भाग है और यहां से शिलांग शहर का मनोहारी एवं विहंगम दृश्य दिखाई देता है। शिलांग पीक की ऊंचाई 1,961 मी॰ (6,434 फीट) है। पठार के पश्चिमी भाग गारो पर्वत में है और अधिकतर समतल है। गारो पर्वतमाला का उच्चतम शिखर नोकरेक पीक है जिसकी ऊंचाई 1,515 मी॰ (4,970 फीट) है।

जलवायु[संपादित करें]

इन्हें भी देखें: मेघालय की जलवायु

कुछ क्षेत्रों में वार्षिक औसत वर्षा 12,000 मि॰मी॰ (39 फीट) के साठ मेघालय पृथ्वी पर आर्द्रतम स्थान है।[14] पठार का पश्चिमि भाग, जिसमें गारो पर्वतों के निचले भाग आते हैं वर्षपर्यन्त उच्च तापमान में रहता है। ऊंचाईयों वाले शिलांग एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रायः कम तापमान रहता है। इस क्षेत्र का अधिकतम तापमान यदा कदा ही 28 °से. (82 °फ़ै) से नीचे जाता होगा,[15] जबकि शीतकालीन उप-शून्य तापमान यहां सामान्य हैं।

चेरापुञ्जी में एक साइनबोर्ड।

राजधानी शिलांग के दक्षिण में खासी पर्वत स्थित सोहरा (चेरापूंजी) कस्बा एक कैलेण्डर माह में सर्वाधिक वर्षा का कीर्तिमान धारक है, जबकि निकटवर्ती मौसिनराम ग्राम वर्ष भर में विश्व की सर्वाधिक वर्षा का कीर्तिमानधारक है।[16]

वन्य जीवन[संपादित करें]

Meghalaya's forests host 660 species of birds[17] and numerous species of other wildlife. Peacock pheasant (top) and hoolock gibbon (bottom) are found in Meghalaya.[18]

राज्य का लगभग ७०% से अधिक भाग वनाच्छादित है, जिसमें से 9,496 कि॰मी2 (1.0221×1011 वर्ग फुट) सघन प्राथमिक उपोष्णकटिबंधीय वन हैं।[8] मेघालयी वन एशिया के प्रचुरतम वनस्पति निवासों में से एक हैं। इन वनों को भरपूर वर्षा उपलब्ध रहती है और यहां प्रचुर मात्रा में वनस्पति एवं वन्य जीव विविधता के संग मिलते हैं। मेघालय के वनों का एक लघु भाग भारत के पवित्र वृक्षों (सैक्रेड ग्रोव्स) के नाम से जाना जाता है। प्राचीन वनों के कुछ छोटे भाग हैं जिन्हें समुदायों द्वारा सैंकड़ों वर्षों से धार्मिक एवं सांस्कृत विश्वास के कारण संरक्षित किया जाता रहा है। ये वन भाग धार्मिक कृत्यों हेतु रक्षित रहते हैं और किसी भी प्रकार के शोषण से सुरक्षित रखे जाते हैं। इन पवित्र ग्रोव्स में बहुत से दुर्लभ पादप एवं पशु आते हैं। पश्चिम गारो हिल्स में नोकरेक बायोस्फ़ेयर रिज़र्व एवं दक्षिण गारो हिल्स में बालफकरम राष्ट्रीय उद्यान को मेघालय के सर्वाधिक जैवविविधता बहुल स्थलों में आते हैं। मेघालय में तीन वन्य जीवन अभयारण्य हैं: नोंगखाईलेम, सिजू अभयारण्य एवं बाघमारा अभयारण्य, जहां कीटभोजी घटपर्णी (पिचर प्लांट) नेपेन्थिस खासियाना का पौधा मिलता है जिसे स्थानीय भाषा में "मे'मांग कोकसी" कहते हैं।

यहां के मौसम और स्थलीय स्थितियों में विविधता के कारण मेघालय के वनों में पुष्पों की प्रजातियों का बाहुल्य है। इनमें परजीवी, एपिफाइट्स, रसभरे पौधों और झाड़ियों की बड़ी विविध प्रजातियां मिलती हैं। यहां की सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष किस्मों में से दो हैं साल का पेड (शोरिया रोबस्टा) और टीक (टेक्टोना ग्रैंडिस) हैं। मेघालय फल, सब्जियों, मसालों और औषधीय पौधों की ढेरों किस्म का घर है। मेघालय अपने विभिन्न प्रकार के ३२५ से अधिक किस्मों के ऑर्किड्स के लिए भी प्रसिद्ध है। इनमें से सर्वाधिक पाई जाने वाली किस्में खासी पर्वतों के मासस्माई, माल्मलुह और सोहरारीम जंगलों में पाई जाती है।

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मेघालय में स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसृपों एवं कीट, कृमियों की भी अनेक किस्में पायी जाती हैं।[19] स्तनधारियों की महत्त्वपूर्ण प्रजातियों में हाथी, भालू, लाल पाण्डा,[20] सिवेट, नेवले, रासू, कृंतक, गौर, जंगली भैंस,[21] हिरण, जंगली सूअर और कई नरवानर गण और साथ ही चमगादड़ की प्रचुर प्रजातियाम भी मिलती हैं। मेघालय की चूनापत्थर गुफ़ाएं जैसे सीजू की गुफ़ाओं में देश की कई लुप्तप्राय एवं दुर्लभ चमगादड़ प्रजातियां मिलती हैं। यहां के लगभग सभी जिलों में हूलॉक जिब्बन भी दिखाई देता है।[22]

यहाम के सामान्यतया पाये जाने वाले सरीसृपों में छिपकलियां, मगरमच्छ और कछुए आते हैं। मेघालय में बड़ी संख्या में सर्पों की प्रजातियां मिलती हैं, जिनमें अजगर, कॉपरहैड, ग्रीन ट्री रेसर, नाग, स्नेक तथा वाइपरीडाए भी आते हैं।[23]

घालय के वनों में पक्षियों की ६६० प्रजातियां मिलती हैं जिनमें से अधिकांश हिमालय की तलहटी क्षेत्रों, तिब्बत एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया की स्थानिक हैं। यहां पायी जाने वाली पक्षी प्रजातियों में से ३४ विश्वव्यापी लुप्तप्राय (एनडेन्जर्ड) प्र्जाति सूची एवं ९ लुप्तप्राय प्रजाति सूची में आती हैं।[17] मेघालय में प्रायः दिखाई देने वाली पक्षी प्रजातियों में फैसियनिडी, एनाटिडी, पोडिसिपेडिडी, सिकोनाईडी, थ्रेस्कियोर्निथिडी, आर्डेडी, पेलिकनिडी, फैलाक्रोकोरैसिडी, एन्हिन्जिडी, फ़ैल्कोनिडी, एसिपिट्रिडी, ओटिडिडी, आदि बहुत सी किस्में हैं।[17] इन प्रत्येक किस्म में बहुत सी प्रजातियां हैं। ग्रेट इण्डियन हॉर्नबिल मेघालय का सबसे बड़ा पक्षी है। अन्य क्षेत्रीय पक्षियों में सलेटी मयूर-तीतर, बड़े भारतीय तोते (इण्डियन पैराकीट), हरे कबूतर एवं ब्लू जे पक्षी आते हैं। [24] मेघालय २५० से अधिक तितलियों का भी गृह स्थान है जो भारत में पायी जाने वाली कुल प्रजातियों का लगभग एक-चौथाई है।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

जनस्खंया[संपादित करें]

मेघालय की जनसंख्या का अधिकांश भाग जनजातीय लोग हैं। इनमें खासी सबसे बड़े समूह हैं, इसके बाद गारो और फ़िर जयन्तिया लोग आते हैं।

ये उन लोगों में से थे जिन्हें अंग्रेज लोग "पहाड़ी जनजाति" कहा करते थे। इनके अलावा अन्य समूहों में बियाट, कोच, संबंधित राजबोंगशी, बोरो, हाजोंग, दीमासा, कुकी, लखार, तीवा (लालुंग), करबी, राभा और नेपाली शामिल हैं।

जनगणना 2011 की प्रावधानिक रिपोर्ट के अनुसार, सभी सात उत्तर-पूर्वी राज्यों में से मेघालय में २७.८२% की उच्चतम दशक की जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गई। २०११ तक मेघालय की जनसंख्या २९,६४,००७ हो जाने का अनुमान है; जिसमें से १४,९२,६६८ महिलाएं एवं १४,७१,३३९ पुरुष होने का अनुमान है। भारत की २०११ की जनगणना के अनुसार, राज्य में लिंग अनुपात प्रति १००० पुरुषों पर ९८६ महिलाएं रहा जो राष्ट्रीय औसत ९४० से कहीं अधिक है। यहां का शहरी महिला लिंगानुपात ९८५ ग्रामीण लिंगानुपात ९७२ से अधिक है।[26]

धर्म[संपादित करें]


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मेघालय में धर्म (२०११)[27] ██ ईसाई (74.59%)██ हिन्दू (11.52%)██ इस्लाम (4.39%)██ सिख (0.10%)██ बौद्ध (0.33%)██ जैन (0.02%)██ जनजातीय धर्म (8.70%)██ अन्य (0.35%)

मेघालय भारत के उन तीन राज्यों में से एक है जहां ईसाई बाहुल्य है। यहाँ की लगभग ७५% जनसंख्या ईसाई धर्म का अनुसरण करती है जिनमें प्रेस्बिटेरियन, बैपटिस्ट और कैथोलिक आम संप्रदायों में आते हैं। मेघालय में लोगों का धर्म उनकी जाति से निकटता से संबंधित है। गारो जनजाति के ९०% और खासी जनजाति के लगभग ८०% लोग ईसाई है, जबकि हजोंग जनजाति के ९७% से अधिक, कोच के ९८.५३% और राभा जनजातियों के ९४.६०% लोग हिंदू हैं।

2001 की जनगणना के अनुसार मेघालय में रहने वाले ६,८९,६३९ गारो जनसंख्या में से अधिकांश ईसाई हैं, और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कुछ लोग ही सोंगसेरेक धर्म का पालन करते हैं। ११,२३,४९० खासी लोगों में से अधिकांश ईसाई थे, २,०२,९७८ स्वदेशी नियाम खासी / शॉनोंग / नियाम्त्रे, १७,६४१ हिंदू थे और २,९७७ मुस्लिम थे। मेघालय में कई कम जनसंख्या वाली जनजातियां भी हैं, जिनमें हाजोंग (३१,३८१ - ९७.२३% हिंदू), कोच (३१,३८१ -९८.५३% हिंदू), राभा (२८,१५३ - ९४.६०% हिंदू), मिकिर (११,३९९ - ५२% ईसाई और ३०% हिंदू) शामिल हैं, तीवा (लालंग) (८,४३८ - ९६.१५% ईसाई) और बाएट (१०,०८५ - ९७.३०% ईसाई)।ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाओं

स्वदेशी से ईसाईयत को धर्मान्तरण ब्रिटिश काल में १९वीं शताब्दी से आरम्भ हुआ। १८३० में अमेरिकन बापटिस्ट फ़ारेन मिशनरी सोसायटी पूर्वोत्तर में सक्रिय हुई और स्वदेशी से इनका धर्मान्तरण ईसाईयत को किये जाने की प्रक्रिया आरम्भ हुई। [28] कालान्तर में उन्हें चेरापुञ्जी, मेघालय तक आपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने का प्रस्ताव भी मिला पर्याप्त किन्तु संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने मना कर दिया। वैल्श प्रेसबाईटेरियन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और चेरापुञ्जी मिशन क्षेत्र में खार्य आरम्भ कर दिया। १९०० के आरम्भ तक प्रोटेस्टैण्ट ईसाई मिशन भी मेघालय में सक्रिय होने लगे थे। विश्व युद्ध के आरम्भ होने के कारण यहां के प्रचारकों को इस कार्य को छोड कर यूरोप एवं अमेरिका में अपने घरों को लौटने पर बाध्य होना पडा। यही वह काल था जब कैथोलिकन मत ने मेघालय व पडोसी क्षेत्रों में अपनी जडें फ़ैलानी आरम्भ की थीं। २०वीं श्ताब्दी में यूनियन क्रिश्चियन कालेज ने बडापानी, शिलांग में अपना संचालन शुरू किया। वर्तमाण में प्रेसबाईटेरियन और कैथोलिक ही यहां के सर्वाधिक प्रचलित ईसाई मत हैं।[29]

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२००१ में मेघालय में भाषाएं[2][30][31][32] ██ खासी (47.05%)██ गारो (31.41%)██ बंगाली (8.01%)██ नेपाली/गोरखी (2.25%)██ हिन्दी (2.16%)██ मराठी (1.67%)██ असमिया (1.58%)██ हैजोंग (1.06%)██ कुकी (0.43%)██ अन्य (6.58%)

भाषाएं[संपादित करें]

राज्य की आधिकारिक एवं सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा अंग्रेजी है।[33] इसके अलावा यहां की अन्य प्रधान भाषाएं हैं खासी और गारो।

खासी (जिसे खसी, खसिया या क्यी भी कहते हैं) ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाओं के मोन-ख्मेर परिवार की एक शाखा है। २००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार खासी भाषा को बोलने वाले ११,२८,५७५ लोग मेघालय में रहते हैं। खासी भाषा के बहुत से शब्द की इण्डो-आर्य भाषाएं जैसे नेपाली, बांग्ला एवं असमिया से लिये गे हैं। इसके अलावा खासी भाषा की अपनी कोई लिपि नहीं है और यह भारत में अभी तक चल रही मोन-ख्मेर भाषाओ में से एक है।

गारो भाषा का कोच एवं बोडो भाषाओ से, जो कि तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य हैं, इनसे निकट सामीप्य है। गारो भाषा अधिकांश जनसंख्या द्वारा बोली जाती है और इसकी कई बोलियां प्रचलित हैं, जैसे अबेंग या अम्बेंग,[34] अटोंग, अकावे (या अवे), मात्ची दुआल, चोबोक, चिसक मेगम या लिंगंगम, रुगा, गारा-गञ्चिंग एवं माटाबेंग।

इनके अलावा मेघालय में बहुत सी अन्य भाषाएं भी बोली जाती हैं, जैसे प्नार भाषा पश्चिम एवं पूर्वी जयन्तिया पर्वत पर पर बहुत से लोगों द्वारा बोली ज्ती हैं। यह भाषा खासी भाषा से संबंधित है। अन्य भाषाओ के अलावा वार जयन्तिया (पश्चिम जयन्तिया पर्वत), मराम एवं लिंगंगम (पश्चिम खासी पर्वत), वार पिनर्सिया (पूर्वी खासी पर्वत), के लोगों द्वारा बहुत सी बोलियां भी बोली जाती हैं। री-भोई जिले के तीवा लोगों द्वारा तीवा भाषा बोली जाती है। मेघालय के असम से लगते दक्षिण-पूर्वी भागों में बसने वाले बडी संख्या में लोगों द्वारा बियाट भाषा बोली जाटी है। नेपाली भाषा राज्य के लगभग सभी भागों में बोली जाती है।

विभिन्न जातीय और जनसांख्यिकीय समूहों में अंग्रेजी एक समान भाषा के रूप में बोली जाती है। शहरी क्षेत्रों में अधिकतर लोग अंग्रेजी बोल सकते हैं; ग्रामीण निवासियों की क्षमता में भिन्नता मिलती है।

मेघालय में भाषाएं[35][36]
भाषा भाषा परिवार भाग
खासी ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाओं 47.05%
गारो तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार 31.41%
बंगाली हिंद-आर्य 8.01%
नेपाली/गोरखी हिंद-आर्य 2.25%
Hindi हिंद-आर्य 2.16%
मराठी हिंद-आर्य 1.67%
असमिया हिंद-आर्य 1.58%
हैजोंग हिंद-आर्य 1.06%
बियाट तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार 1.01%
तीवा (लालंग) तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार 1.02%
राभा तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार 0.97%
कोच तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार 0.90%
कुकी तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार 0.43%

जिले[संपादित करें]

राज्य की राजधानी, शिलांग का विहंगम दृश्य।

मेघालय में वर्तमान में ११ जिले हैं।[37]

जयन्तिया हिल्स मंडल:

गारो हिल्स मंडल:

जयन्तिया हिल जिला २२ फ़रवरी १९७२ को सृजित किया गया था। इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफ़ल 3,819 वर्ग किलोमीटर (4.111×1010 वर्ग फुट) है और भारत की जनगणना २०११ के अनुसार यहां की जनसंख्या २,९५,६९२ है। यहां का जिला मुख्यालय जोवाई में स्थित है। जयन्तिया हिल्स जिला राज्य में कोयले का सबसे बडा उत्पादक जिला है। जिले भर में कोयले की खानें दिखाई देती हैं। इसके अलावा यहां चूनेपत्थर का खनन भी वृद्धि पर है क्योंकि सीमेण्ट उद्योग यहां जोरों पर है और उसमें चूनेपत्थर की ऊंची मांग है। हाल के कुछ वर्षों में ही एक बडे जिले को दो छोटे जिलों: पश्चिम जयतिया एवं पूर्वी जयन्तिया हिल्स में बांट दिया गया था।

पूर्वी खासी हिल्स जिले को खासी हिल्स में से २८ अक्तूबर १९७६ को निकाल कर नया जिला बनाया गया था। जिले का विस्तार 2,748 वर्ग किलोमीटर (2.958×1010 वर्ग फुट) में है और भारत की जनगणना २०११ के अनुसार यहां की जनसंख्या ६,६०,९२३ है। ईस्ट खासी हिल्स जिले का मुख्यालय राज्य की राजधानी शिलांग में है।

री-भोइ जिले की स्थापना इसी ईस्ट खासी जिले को विभाजित कर ४ जून १९९२ को हुई थी। री-भोई जिले का कुल क्षेत्रफ़ल 2,448 वर्ग किलोमीटर (2.635×1010 वर्ग फुट) है और भारत की जनगणना २०११ के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या १,९२,७९५ है। जिले का मुख्यालय नोंगपोह में है। यहां की भूमि पर्वतीय है और वनाच्छादित है। री-भोई जिला अपने अनानासों के लिये प्रसिद्ध है और राज्य में अनानास का सबसे बडा उत्पाद्क क्षेत्र है।

पश्चिम खासी हिल्स जिला राज्य का सबसे बडा जिला है औ इसका क्षेत्रफ़ल 5,247 वर्ग किलोमीटर (5.648×1010 वर्ग फुट) है और भारत की जनगणना २०११ के अनुसार जिले की जनसंख्या २,९४,११५ है। यह जिला खासी हिल्स जिले से काटकर २८ अक्तूबर १९७६ को बनाया गया था। जिले का मुख्यालय नोंगस्टोइन में है।

ईस्ट गारो हिल्स जिले की स्थापना १९७६ में की गयी थी और इसकी जनसंख्या २००१ की जनगणना अनुसार २,४७,५५५ है। इस जिले का विस्तार 2,603 वर्ग किलोमीटर (2.802×1010 वर्ग फुट) में है। जिले का मुख्यालय विलियमनगर में है जिसे पहले सिमसानगिरि बोला जाता था। नोंगलबीबरा जिले का एक कस्बा है जहां बडी संख्या में कोयले की खानें हैं। यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग ६२ द्वारा कोयला ग्वालपाडा और जोगीघोपा को भेजा जाता है।

पश्चिम गारो हिल्स जिला राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित है और इसका भौगोलिक विस्तार 3,714 वर्ग किलोमीटर (3.998×1010 वर्ग फुट) में है। २००१ की जनगणनानुसार जिले की जनसंख्या ५,१५,८१३ है और जिले का मुख्यालय तुरा में है।

द्क्षिण गारो हिल्स जिला १८ जून १९९२ को तत्कालीन पश्चिम गारो हिल्स जिले को विभाजित कर बनाया गया था। जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्र 1,850 वर्ग किलोमीटर (1.99×1010 वर्ग फुट) है और वर्ष २००१ की जनगणनानुसार यहां की जनसंख्या ९९,१०० है। जिले का मुख्यालय बाघमारा में है।

वर्ष २०१२ के स्थितिनुसार राज्य में ११ जिले, १६ नगर व कस्बे और अनुमानित ६,०२६ ग्राम थे।[38]

शिक्षा[संपादित करें]

Indian Institute of Management, Shillong

मेघालय में विद्यालय राज्य सरकार, निजी संगठनों एवं धार्मिक संस्थानों द्वारा संचालित होते हैं। शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी ही है। अन्य भारतीय भासाएं जैसे असमिया, बंगाली, हिन्दी, गारो,खासी, मीजो, नेपाली और उर्दु वैकल्पिक विषयों की श्रेणी में पढायी जाती हैं। माध्यमिक शिक्षा की शिक्षा बोर्ड्स से सम्बद्ध है जैसे काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्ज़ामिनेशंस (आईसीएसी), केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसी), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (ओपन स्कूल) और मेघालय शिक्षा बोर्ड

१०+२+३ शिक्षा पद्धति के अन्तर्गत्त, माध्यमिक शिक्षा पूर्ण होने के उपरान्त विद्यार्थी प्रायः २ वर्ष कनिष्ठ महाविद्यालय (जूनियर स्कूल) में शिक्षण लेते हैं जिसे प्री-युनिवर्सिटी कहते हैं, या फ़िर उच्चतर माध्यमिक शिक्षा सुविधा वाले किसी मेघालय शिक्षा बोर्ड या केन्द्रीय शिक्षा बोर्ड से सम्बद्ध विद्यालय में प्रवेश लेते हैं। विद्यार्थी तीन में से किसी एक विधा को चुनते हैं: कला, वाणिज्य या विज्ञान। दो वर्ष का कार्यक्रम सफ़लतापूर्वक पूर्ण करने के उपरान्त विद्यार्थी किसी सामान्य या व्यावसायिक स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं।

विश्वविद्यालय[संपादित करें]

महाविद्यालय[संपादित करें]

Saint Mary's College (Shillo सेंट मैरी कालेज, शिलांगng)
Tikrikilla College, Tikrikilla W.Garo Hi टिकरीकिल्ला कालेज, वेस्ट गारो हिल्सlls

मशहूर हस्ती[संपादित करें]

राजनीति[संपादित करें]

प्रमुख तथ्य[संपादित करें]

  • क्षेत्रफल: 22,429 km²
  • जनसंख्या: 2,175,000 (2000)

जातीय विभाग:[संपादित करें]

धर्म:[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]