विकिपीडिया वार्ता:निर्वाचित तस्वीर/पुरालेख १

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(vandalism removed)--पूर्णिमा वर्मन ०४:४०, ५ अप्रैल २००८ (UTC)

मार्च महीने के लिए कृपया इस चित्र के लिए विचार करें । लेख के लिए देखे चित्रकोट । --गुंजन वर्मासंदेश १०:२५, २४ फरवरी २००९ (UTC)
जिस तस्वीर का लिंक यहां पर गुंजन जी ने दिया है वह तस्वीर अच्छी जरूर है लेकिन उसे निर्वाचित करना मुस्किल है। यह तस्वीर निर्वाचन के लिए आवश्यक परख पर खरा नहीं उतरती है। --Munita Prasadवार्ता १०:४७, २४ फरवरी २००९ (UTC)

मुनिता जी क्या यह चित्र सिर्फ़ कम resolution के कारण निर्वाचित नही हो सकता । अगर ऐसा है तो अंग्रेज़ी विकी पर इसका मौलिक version जो की 2056X1540 resolution उपलब्ध हैं । --गुंजन वर्मासंदेश ११:१६, २४ फरवरी २००९ (UTC)

आपने पूछा कि क्या यह चित्र सिर्फ़ कम resolution के कारण निर्वाचित नही हो सकता। तो इसका जवाब है हां। कम रिजोल्यूशन वाले पैनारोमिक चित्रो को आमतौर पर निर्वाचित नहीं किया जाता है। आपने जिस चित्र को प्रस्तावित किया था उसका रिजोल्यूशन 800X600 था। इसलिए मैंने अपना मत ऐसा दिया था। हां, यदि उसका अधिक रिजोल्यूशन का अवतरण है तो उसको अपलोड कर के प्रस्तावित कर सकते हैं। --Munita Prasadवार्ता १२:०४, २४ फरवरी २००९ (UTC)
मुनिताजी मैंने नए चित्र को अपलोड कर दिया है कृपया यहाँ देखे --गुंजन वर्मासंदेश १२:४६, २४ फरवरी २००९ (UTC)
केवल बड़े रिज़ोल्यूशन के कारण कोई चित्र निर्वाचित घोषित नहीं होता है। निर्वाचित चित्र की वोटिंग और परख विकिमीडिया कामंस के विशेषज्ञ फ़ोटोग्राफ़रों- फोटो समीक्षकों के वाद विवाद के बाद तय होती है। [1] शायद अंग्रेज़ी विकिपीडिया ने अपना अलग उम्मीदवार पृष्ठ भी रखा है। [2] आमतौर पर ग्राफ़िक डिज़ायनर और फ़ोटोग्राफर खुद अपना चित्र प्रस्तावित करते हैं। अगर भारत के कुछ चुने हुए प्रसिद्ध 2-3 फ़ोटोग्राफ़र भी यहाँ होते तो बात बन सकती थी, पर ऐसा तो अभी संभव नहीं दिखता। दूसरों के चित्रों पर फ़ालतू बहस करने से कोई फ़ायदा नहीं जबकि हमारे यहाँ कोई फ़ोटो विशेषज्ञ नहीं है। अधिकतर विकिपीडिया कामंस द्वारा चुने गए चित्रों के संग्रह में से ही किसी को अपने विकिपीडिया में स्थान देते हैं। जैसा हम भी अभी तक करते रहे हैं। इसलिए आसान तरीका यह है कि विकिमीडिया कामंस के चुने हुए चित्रों में से ही एक प्रदर्शित कर दिया जाय। अन्यथा यह स्तरहीन तो होगा ही हास्यास्पद भी होगा। हमें बहुत दिशाओं से तरह तरह के प्रयत्न करने के स्थान पर सही हिन्दी लिखने और सुगठित रचना शैली पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। --पूर्णिमा वर्मन १७:२८, २४ फरवरी २००९ (UTC)